
सिंधिया राज परिवार
भारतीय राज परिवारों की बात हो और उसमे सिंधिया राज घराने का उल्लेख ना हो ऐसा संभव नहीं है। सिंधिया राज घराना अपने शौर्य, गौरव और संस्कृति के अलावा अपनी शानो शौकत के लिए जाना जाता है।आज आधुनिक भारत में भी सिंधिया परिवार अपना रुतबा और पहचान बनाये हुए है और साथ ही राजनीती में भी एक अलग मुकाम हासिल किया है। सिंधिया परिवार के उत्तराधिकारि आज वर्तमान में भी कई राजनैतिक उच्च पदों पर कार्यरत है और देश की सेवा और उन्नति में अपना योगदान दे रहे है।
सिंधिया राज घराने का उदय
सिंधिया राज घराने की शुरुआत राणोजी सिंधिया से मानी जाती है। राणोजी सिंधिया 18वीं शताब्दी में पेशवा बाजीराव प्रथम के प्रमुख सेनापतियों में से एक थे।राणोजी सिंधिया मूल रूप से मराठा थे और उन्होंने अपनी सैन्य प्रतिभा के बल पर उत्तरी भारत में मराठा प्रभाव को स्थापित किया। उन्हें मालवा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई और यहीं से सिंधिया वंश का राजनीतिक उदय शुरू हुआ।
ग्वालियर सिंधिया परिवार का मुख्य केंद्र
सिंधिया घराने का सबसे प्रसिद्ध केंद्र रहा है ग्वालियर राज्य (वर्तमान मध्य प्रदेश)। राणोजी सिंधिया के बाद उनके पुत्रों ने इस राज्य को मजबूत किया। धीरे-धीरे ग्वालियर मराठा साम्राज्य का एक प्रमुख शक्ति केंद्र बन गया। ग्वालियर किला, जो आज भी भारत के सबसे भव्य किलों में गिना जाता है, सिंधिया शासकों की शक्ति और स्थापत्य कला का प्रतीक है।
महादजी सिंधिया एक महान शाशक
सिंधिया वंश के शाशको में महादजी सिंधिया का नाम सबसे ऊपर आता है, उन्हें सिंधिया परिवार का वास्तविक निर्माता भी कहा जाता है। महादजी सिंधिया ही वो शाशक थे जिन्होंने उत्तर भारत में मराठा साम्राज्य को दुबारा स्थापित किया और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय को सरक्षण देकर दिल्ली की सत्ता पर नियंत्रण रखा। साथ ही महादजी सिंधिया ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भी चुनौती दी और उनके विस्तार को लंबे समय तक रोके रखा।
सिंधिया शाशको का सांस्कृतिक योगदान
सिंधिया परिवार के शाशको ने संगीत, साहित्य, स्थापत्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को सरक्षण दिया और उन्हें आगे बढाने के लिए काफी योगदान दिया।
ग्वालियर घराना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे प्रतिष्ठित घराना माना जाता है। सिंधिया शाशको ने कई संगीतकारों को सरक्षण दिया और साथ ही तानसेन की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने में भी एक महत्त्व पूर्ण योगदान दिया। ध्रुपद और ख्याल गायकी को विशेष बढ़ावा देने का श्रेय भी इन्हे ही जाता है।
संगीत के अलावा स्थापत्य कला , साहित्य और शिक्षा में भी सिंधिया परिवार का अहम् योगदान रहा। जय विलास महल, सूरज कुंड और कई भव्य मंदिरो और क्षत्रियो का निर्माण सिंधिया परिवार के द्वारा किया गया। साथ ही शिक्षा और साहित्य में भी एक अहम् योगदान दिया और उनके शाशन काल में कई विद्वान और कवियों को इस परिवार ने सरक्षण दिया और कई शिक्षा सस्थान बनाने में भी अहम् भूमिका निभाई।
आधुनिक राजनीती में सिंधिया परिवार
आजादी के बाद से ही सिंधिया परिवार का राजनीती में भी अपना रसूख रखता है और परिवार के कई सदस्यों ने केंद्र और राज्य की सरकारों में अहम् भूमिका निभाई है।
सिंधिया परिवार की राजनितिक शुरुआत विजयाराजे सिंधिया से हुई जिन्हे लोग राजमाता के नाम से भी बुलाया करते थे। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने कई बड़े चुनाव लड़े और उनमे जित भी हासिल की। राजमाता के अलावा उनके बेटे माधवराव सिंधिया और वर्तमान में उनके पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राजनीती में सक्रीय है और देश और मध्यप्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख नेता के तोर पर जाने जाते है।